बारिश की हर बूंद में तुम

बारिश की हर बूंद में तुम

बारिश की हर बूंद में तुम

जब पहली बारिश आई थी उस शाम,

आसमान ने जैसे अपना दिल खोल दिया था,

और धरती ने चुपचाप आँचल फैला दिया —

मैं खिड़की के पास बैठा था,

और हर गिरती हुई बूंद में

तुम्हारा नाम सुनाई दे रहा था।


बारिश सिर्फ पानी नहीं होती,

किसी की यादों का अनुवाद होती है,

किसी अधूरी कहानी का संगीत होती है,

और उस दिन —

वो सिर्फ बारिश नहीं थी,

वो तुम थीं…

जो दूर होकर भी मेरे पास उतर रही थीं।


टप… टप… टप…

छत से गिरती बूंदों की आवाज़

जैसे तुम्हारी हँसी की गूँज हो,

और हर लहराती हवा

जैसे तुम्हारे बालों की खुशबू लेकर आई हो।


तुम याद हो,

या बारिश की कोई कहानी?

कभी समझ नहीं पाया,

पर इतना जानता हूँ —

जब भी बादल घिरते हैं,

दिल तुम्हारी ओर भागने लगता है।


पहले हम साथ बारिश देखते थे,

छतरी छोटी थी,

पर दुनिया बड़ी लगती थी,

तुम्हारे हाथों की गर्मी

ठंडी हवा को भी गीत बना देती थी।


याद है तुम्हें?

वो रास्ता जहाँ कीचड़ था,

और तुम हर कदम संभलकर चलती थीं,

मैं हँसता था —

और तुम नाराज़ होने का नाटक करती थीं।


अब वही रास्ता सूना है,

बारिश अब भी आती है,

पर तुम्हारी आवाज़ नहीं आती।


कभी लगता है

बारिश मेरे लिए रोती है,

जैसे आसमान जानता हो

कि तुम बहुत दूर हो।


एक शाम मैंने बारिश से पूछा —

“क्या तुम उसे देखती हो?”

बारिश ने जवाब नहीं दिया,

बस और तेज़ गिरने लगी।


शायद वो भी तुम्हें याद करती थी।


मेरे कमरे की दीवारें

तुम्हारे नाम से भीग जाती हैं,

जब बारिश खिड़की से टकराती है,

जैसे कोई दस्तक हो —

पर दरवाज़ा खोलने पर

सिर्फ हवा मिलती है।


तुम्हारे जाने के बाद

बारिश बदल गई है,

पहले वो उत्सव थी,

अब वो इंतज़ार है।


पहले हम भीगते थे,

अब मैं सिर्फ भीगने की कल्पना करता हूँ।


तुम्हारी हँसी

अब बिजली की चमक में दिखती है,

और तुम्हारी आँखें

बादलों की गहराई में छिपी लगती हैं।


कभी-कभी लगता है

तुम बारिश बनकर लौटोगी,

मेरे कंधों पर गिरोगी,

और कहोगी —

“मैं कभी गई ही कहाँ थी?”


पर फिर समझ आता है,

कुछ लोग बारिश जैसे होते हैं,

आते हैं, सब भिगो देते हैं,

और फिर आसमान में खो जाते हैं।


हर बूंद में एक कहानी है,

हर कहानी में तुम्हारा चेहरा,

और हर चेहरे में

एक अधूरा सवाल।


क्या तुम्हें भी बारिश याद दिलाती है?

क्या तुम भी किसी खिड़की के पास बैठकर

मेरे बारे में सोचती हो?


रात की बारिश सबसे गहरी होती है,

क्योंकि उसमें कोई शोर नहीं होता,

बस दिल की आवाज़ होती है।


मैंने कई रातें यूँ ही बिताई हैं,

बारिश गिनते हुए,

जैसे हर बूंद तुम्हारी ओर जाने वाला रास्ता हो।


तुम्हारी यादें भी बारिश जैसी हैं —

कभी हल्की फुहार,

कभी तेज़ तूफ़ान।


कभी मुस्कान बन जाती हैं,

कभी आँखों में पानी भर देती हैं।


आज भी जब सड़कें चमकती हैं,

और पेड़ झूमते हैं,

मैं सोचता हूँ —

अगर तुम यहाँ होती,

तो क्या हम फिर वही होते?


शायद नहीं,

क्योंकि समय भी बारिश जैसा है,

वो लौटता तो है,

पर वही नहीं होता।


तुम दूर हो,

इतनी दूर कि आवाज़ भी नहीं पहुँचती,

पर बारिश एक पुल बनाती है —

मेरे और तुम्हारे बीच।


जब यहाँ बारिश होती है,

मैं सोचता हूँ —

शायद वहाँ भी हो रही होगी।


शायद तुम भी खिड़की से बाहर देख रही होगी।

बारिश की हर बूंद में तुम

कभी किसी बूंद में अपना नाम लिखता हूँ,

फिर उसे गिरते हुए देखता हूँ,

जैसे वो तुम्हारे पास जा रही हो।


कितनी अजीब बात है —

बारिश गिरती है ऊपर से,

पर उठाती है नीचे की यादें।


तुम्हारे बिना बारिश अधूरी है,

और मेरे बिना शायद तुम भी।


या शायद मैं सिर्फ एक कहानी हूँ

जो बारिश के साथ खत्म हो जाएगी।


लेकिन सच यह है —

हर बूंद तुम्हारा संदेश है,

हर बादल तुम्हारा ख़त।



और मैं…

बस एक इंतज़ार हूँ,

जो हर बारिश में नया जन्म लेता है।


अगर कभी तुम लौटो,

तो पहली बारिश में आना,

क्योंकि तब मैं पहचान जाऊँगा —

कि यह सिर्फ पानी नहीं,

तुम हो…

जो फिर से मेरी दुनिया में उतर आई हो।


और जब आख़िरी बारिश होगी,

शायद मैं आसमान से पूछूँगा —

“क्या उसने मुझे याद किया?”


और शायद कोई बूंद

मेरे गाल पर गिरकर कहेगी —

“हाँ…”


क्योंकि बारिश कभी झूठ नहीं बोलती,

वो सिर्फ दिल की बातें कहती है,

और मेरे दिल में

आज भी तुम ही बरसती हो।

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